जवानों की लाश पर सिद्धू की पहल और मोदी की चाय वाली राजनीति शुरू

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आत्मघाती हमले में 20 से अधिक जवान शहीद हो गए हैं. जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों ने सीआरपीएफ की बस पर आत्मघाती हमले की जिम्मेदारी ली है. हमले के बाद इस मुद्दे पर राजनीति भी तेज हो गई है. भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के प्रवक्ता के बीच हमारे न्यूज चैनल ‘आजतक’ पर तीखी बहस हुई. संबित पात्रा ने कांग्रेस पर हमला करते हुए नवजोत सिंह सिद्धू के पाकिस्तान दौरे को घेरा तो वहीं कांग्रेस की प्रियंका चतुर्वेदी ने भी नरेंद्र मोदी के नवाज शरीफ से मिलने पर निशाना साधा.

आजतक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि इस हमले से मोदी सरकार पर सवालिया निशान खड़ा होता है, जवान बॉर्डर पर शहीद हो रहा है और मोदी सरकार उन्हें जूते-कपड़े के पैसे भी नहीं देती है. उन्होंने कहा कि जब कश्मीर में सेना के जवान आतंकियों के खिलाफ लड़ रहे थे, तो सरकार के मंत्री उरी फिल्म का प्रमोशन How’s the Josh के नारे लगाकर कर रहे थे.

इस आरोप पर बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने पलटवार किया. उन्होंने कहा कि ये वही कांग्रेस पार्टी है जिन्होंने हाल ही में अपने नेता नवजोत सिंह सिद्धू को पाकिस्तान भेजा था. संबित पात्रा ने कहा कि नवजोत सिंह सिद्धू ने राहुल गांधी के कहने पर पाकिस्तान में जीवे-जीवे पाकिस्तान के नारे लगाए थे.

प्रियंका चतुर्वेदी ने भी इसका तीखा जवाब दिया और कहा कि 56 इंच के सीने की बात करने वाले नरेंद्र मोदी ने 2014 के चुनाव में वादे किए थे कि पाकिस्तान को आंख दिखाएंगे. लेकिन नरेंद्र मोदी ने सरकार बनाते ही नवाज शरीफ को बुला लिया, उसके बाद बिना किसी को बताए शादी में शामिल होने के लिए नवाज शरीफ के घर पाकिस्तान चले जाते हैं. उन्होंने कहा कि हमारा हक है कि हम देश के प्रधानमंत्री से सवाल पूछें.

आपको बता दें कि पिछले ही साल पाकिस्तान ने करतारपुर कॉरिडोर खोलने की बात कही थी, पंजाब सरकार में मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के बुलावे पर पाकिस्तान गए थे, वहां पर भाषण देते हुए उन्होंने इमरान खान की काफी तारीफ की थी.

गौरतलब है कि गुरुवार दोपहर को पुलवामा में CRPF की बस पर हमला कर दिया. इस हमले की जिम्मेदारी जैश-ए-मोहम्मद ने ली है. अभी तक इस हमले में 20 से अधिक जवान शहीद हो गए हैं, जबकि 40 से अधिक जवान घायल हुए हैं. गृह मंत्री राजनाथ सिंह शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर जाएंगे.

बताया जा रहा है कि कश्मीर के पुलवामा में जिस सड़क पर यह हमला हुआ वह पिछले कई दिनों से बर्फबारी के कारण बंद थी और कल ही इसे खोला गया था. इस हमले को अंजाम देने के लिए आतंकियों ने सुरक्षाबलों के काफिले के एक वाहन पर आत्मघाती हमला किया. इस काफिले में 50 से ज्यादा वाहन शामिल थे जिसमें 2500 जवान सवार थे. सुरक्षाबलों की इतनी बड़ी मूवमेंट और एजेंसियों के अलर्ट के बावजूद इस हमले का होना सुरक्षा में बहुत बड़ी चूक कहा जा सकता है.

सर्जिकल स्ट्राइक के बाद यह माना जा रहा था कि पाकिस्तान इससे सीख लेते हुए अपने नापाक मंसूबों पर लगाम लगाएगा. निजाम बदलने के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी अमन-ओ-अमान की बात की थी. लेकिन इमरान भी पाकिस्तान की धरती पर आतंकवाद की उपज रोकने में नाकाम रहे. इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ठीक 10 दिन पहले 5 फरवरी को कराची में खुले-आम आतंक का आका मौलाना मसूद अजहर का छोटा भाई और जैश-ए-मोहम्मद का सरगना मौलाना रऊफ असगर रैली करता है और भारत को दहला देने का ऐलान करता है.

साल की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एएनआई को दिए अपने इंटरव्यू में कहा था हम पाकिस्तान से 1965, 1971, कारगिल युद्ध लड़ चुके हैं. एक लड़ाई (सर्जिकल स्ट्राइक) से पाकिस्तान सुधर जाएगा, ये सोचना बहुत बड़ी गलती होगी. पाकिस्तान को सुधरने में अभी और समय लगेगा. बहरहाल पुलवामा में हुए इस बड़े आतंकी हमले से पाकिस्तान एक बार फिर बेनकाब हुआ है तो वहीं देश में सुरक्षा को लेकर भी बड़ा सवाल खड़ा हुआ है.

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