एलओसी पर गोलाबारी, पाकिस्तान के 4 लोगों की मौत

पाकिस्तान के बालाकोट में भारतीय वायुसेना के एक चरमपंथी संगठन के शिविर पर हमले के बाद कश्मीर से लगती नियंत्रण रेखा पर तनाव बढ़ गया है. नियंत्रण रेखा पर कई जगह दोनों देशों के सुरक्षाबलों के बीच गोलाबारी की ख़बर है.

भारत और पाकिस्तान दोनों ने ही एक-दूसरे पर कश्मीर से लगती नियंत्रण रेखा पर संघर्ष विराम के उल्लंघन का आरोप लगाया है.

मंगलवार की शाम को कोटली सेक्टर में भारतीय सुरक्षाबलों की गोलाबारी में चार लोगों की मौत की ख़बर है. मरने वालों में तीन महिलाएं और एक बच्चा शामिल है. गोलीबारी में कई लोग घायल भी हुए हैं. अधिकारियों के मुताबिक भारतीय सुरक्षा बलों ने नियंत्रण रेखा पर रवाकोट, भांबर, चाकोत, और कोटली में मशीनगनों से गोलियां चलाई और कई मोर्टार दागे.

कोटली ज़िले में गोलाबारी का असर सबसे अधिक हुआ. नियंत्रण रेखा से लगे इसे सभी चार सेक्टर्स में भारी गोलाबारी हुई.

भारतीय सेना के मुताबिक पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने नियंत्रण रेखा के करीब संघर्ष विराम का उल्लंघन किया है.

सेना ने दावा किया है कि पाकिस्तान की ओर से जम्मू कश्मीर के अखनूर, नौशेरा और कृष्णा घाटी सेक्टर में संघर्ष विराम का उल्लंघन किया.

सेना की ओर से जारी बयान में कहा गया है, " ये (संघर्ष विराम उल्लंघन) भारतीय समय के मुताबिक करीब 1730 बजे शुरू हुआ. पाकिस्तान ने बिना उकसावे के भारी गोलीबारी के जरिए संघर्ष विराम उल्लंघन किया. भारतीय सेना मजबूती और प्रभावी तरीके से जवाब दे रही है."

सेना के मुताबिक इस हमले में सेना के पांच जवान घायल हुए हैं और उन्हें सेना के अस्पताल ले जाया गया है.

पुंछ और राजौरी ज़िले के नियंत्रण रेखा से पांच किलोमीटर तक दूरी के सभी स्कूलों को अगले आदेश तक बंद रखने को कहा गया है.

भारत प्रशासित कश्मीर के पुलवामा में 14 फ़रवरी को केंद्रीय रिज़र्व पुलिसबल के काफ़िले पर हुए चरमपंथी हमले के बाद दोनों के बीच भारी तनाव है. इस हमले में सीआरपीएफ़ के 40 से अधिक जवान मारे गए थे. भारत ने इस हमले के लिए पाकिस्तान स्थित चरमपंथी संगठन जैश ए मोहम्मद को ज़िम्मेदार ठहराया है, जबकि पाकिस्तान इन आरोपों को सिरे से ख़ारिज करता है.

अबू धाबी में एक मार्च, 2019 को आर्गेनाइजेशन ऑफ़ इस्लामिक कॉपरेशन (ओआईसी) के विदेश मंत्रियों की परिषद के 46वें सत्र के उद्घाटन में भारत पहली बार आमंत्रित मेहमान के तौर पर शिरकत करेगा.

मेज़बान संयुक्त अरब अमीरात ने भारत को आमंत्रित किया है तो उसकी कई वजहें हैं, पहली वजह तो यही है कि यह दुनिया भर में भारत के बढ़ते कद के तौर पर मिल रही मान्यता है. इसके अलावा भारत की अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक परंपरा है और इस परंपरा में इस्लाम का घटक भी शामिल है.

संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्लाह बिन ज़ायद अल नाहयान से आमंत्रण स्वीकार करने के बाद भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा, यह दोनों देशों के बीच गहरी होती रणनीतिक समझदारी का संकेत तो है ही साथ में भारत के करीब 18.5 करोड़ मुस्लिमों का सम्मान भी है.

यह आमंत्रण, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की भारत और पाकिस्तान यात्रा के ठीक बाद आया है, माना जा रहा है कि सलमान ने भारत और पाकिस्तान के बीच बेहतर संबंधों की वकालत की है.

वैसे ये भारत के लिए बेहतरीन मौके के तौर पर आया है, क्योंकि भारत इस्लामिक मुख्यधारा वाली संस्था में पाकिस्तान की प्रतिष्ठा पर सवाल खड़े कर सकता है. भारत को यह आमंत्रण संयुक्त अरब अमीरात की ओर से मिला है, लेकिन इसे आर्गेनाइजेशन ऑफ़ इस्लामिक कॉपरेशन (ओआईसी) के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

पाकिस्तान और सऊदी अरब के चलते ही ओआईसी की पहली बैठक में भारत बाहर रहा था. पहली बैठक 1969 में मोरक्को की राजधानी राबत में हुई थी. तब इसे इस्लामिक कांफ्रेंस आर्गेनाइजेशन कहा जाता था. इसके बाद से ही, दुनिया में दूसरी सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी का देश होने के बावजूद भारत को ओआईसी की सदस्यता नहीं मिली. पाकिस्तान इस मंच का इस्तेमाल हमेशा भारत के तीखे विरोध के लिए करता रहा है.

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