हामिद अंसारी इस पाकिस्तानी औरत की वजह से लौट पाए भारत, कौन है ये महिला?

साल 2012 में फ़ेसबुक पर बनी एक दोस्त से मिलने के लिए हामिद पाकिस्तान गए थे. जहां पाकिस्तान के कोहाट में जासूसी और बिना दस्तावेज़ के आरोप में हामिद को गिरफ्तार कर लिया गया था.

पाकिस्तानी जेल से मिली रिहाई के बाद मंगलवार को हामिद अपने परिवार से वाघा बॉर्डर पर मिले. यहां पर पाकिस्तानी अधिकारियों ने हामिद को भारतीय अधिकारियों के हवाले किया.

हामिद का परिवार उन्हें लेने के लिए अमृतसर पहुंचा हुआ था. उनके परिवार ने दोनों मुल्कों की सरकार का शुक्रिया अदा करते हुए कहा, ''आज का दिन हमारे लिए ईद जैसा है.''

इस मौक़े पर हामिद की मां ने कहा, ''ये सामूहिक प्रयास है. हम बहुत छोटे लोग हैं और ख़ुद कुछ नहीं कर पाते. सरकार ने इस सारे मामले को सकारात्मक तरीक़े से लेते हुए पहले दिन से ही हमारी मदद की है. सरकारी अधिकारियों का व्यवहार परिवार जैसा था. हमारी आवाज़ काफ़ी कमज़ोर थी लेकिन मीडिया हमारी आवाज़ बना. इसके अलावा एनजीओ ने भी मदद की. ब्रिटेन से भी लोगों ने हमारी मदद की. अरविंद शर्मा नाम के वक़ील ने बिना फ़ीस के सुप्रीम कोर्ट तक हमारा केस रखा.''

वो औरत, जिसने की हामिद की मदद
हामिद की वापसी से ठीक पहले उनकी मां फ़ौजिया के हाथों में चॉकलेट नज़र आई.

वो इस पर कहती हैं, ''मेरे बेटे को चॉकलेट बहुत पसंद है इसलिए मैं उसके लिए चॉकलेट लेकर आई हूं.''

भारत वापसी में हामिद की कई लोगों ने मदद की. इन लोगों में पाकिस्तान की मानवाधिकारों की वक़ील रख्शंदा नाज़ भी शामिल रहीं.

हामिद की रिहाई को लेकर लड़ी क़ानूनी लड़ाई का अनुभव कैसा रहा? रख्शंदा ने बीबीसी हिंदी को इस बारे में विस्तार से बताया. रख्शंदा बताती हैं कि वो हामिद के लिए जेल में जो सामान ले जाती थीं, उससे वो उनके लिए खीर बनाकर रखते थे.

पढ़िए रख्शंदा की ज़ुबानी, इस केस की पूरी कहानी...

17 दिसंबर को जेल में हामिद के जाने की तैयारी हो रही थी. इसी बीच मैं हामिद से मिलने वहां आख़िरी बार पहुंची.

मुझे हामिद के बारे रीता मनचंदा से पता चला था जो भारत में एक समाजसेवी हैं.

हालांकि पाकिस्तानी पत्रकार और समाजसेवी ज़ीनत शहज़ादी ने इस केस के लिए कोर्ट में अपील की थी. हामिद की कस्टडी की सारी जानकारी उन्होंने ही जुटाई थी.

मैं उस वक़्त तीन साल से पाकिस्तान में नहीं थी. जब मैं आई तो ज़ीनत शहज़ादी पाकिस्तान से गुमशुदा थी. हालांकि वो दो साल बाद मिल गई और अब अपने घर वालों के साथ रह रही हैं.

तब से मैं हामिद के साथ संपर्क में हूं. हामिद को पेशावर जेल में पहली बार पेश किया गया और बताया गया कि उन्हें जासूसी के मामले में सज़ा मिली है.

कई दिनों से बेटा ग़ायब था, मेरी उनके परिवार से बात हुई और उनकी मां को तब विश्वास हुआ कि उनका बेटा ज़िंदा है.

इस मामले पर विश्वास क्यों?
मैंने जब ये केस देखा तो मुझे ये मामला सच्चा लगा.

ये मामला सोशल मीडिया से जुड़ा हुआ था और मेरी बात हामिद के परिवार से भी हुई था. ये केस सीनियर एडवोकेट काज़ी मोहम्मद अनवर भी देख रहे थे और उन्होंने जिस तरह इस केस पर काम किया, उसकी वजह से ही आज कामयाबी मिली है.

मैंने इस केस के काग़ज़ हामिद की अम्मी फ़ौजिया अंसारी और रीता मनचंदा से लिए. हालांकि केस तो फ़ाइल हो ही चुका था लेकिन मैं भी इस कैसे में वैसे ही काम करना चाहती थी जैसे बाक़ी लोग कर रहे थे.

इस कामयाबी का पहले श्रेय ज़ीनत को जाना चाहिए, जिसने इंवेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग की और इस केस की सारी जानकारी जुटाई. इसके बिना हामिद के बारे में किसी को नहीं पता चलता.

हामिद जिस लड़की की तलाश में पाकिस्तान आए थे, वो लड़की ख़ैबर पख़्तूनख़्वा प्रांत के कोहाट की रहने वाली थी.

लड़की ने पहचान बताने से मना किया था, जिससे मिलने ख़ुद ज़ीनत गई थीं. ज़ीनत उनके पिता से भी मिलीं और उन दोस्तों से भी बात की, जिन्हें हामिद और इस लड़की के बारे में पता था. हालांकि अब उस लड़की की शादी हो चुकी है.

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