रमन सिंह और करुणा शुक्ला में से किसे चुनेंगे अटल के दीवाने
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी किसके हैं? छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं के लिए ये एक बड़ा सवाल है.
इसकी वजह ये है कि राजनांदगांव की चुनावी जंग में उतरे दो क़द्दावर नेताओं की अटल बिहारी वाजपेयी पर अपनी-अपनी दावेदारी है.
इस सीट पर मुख्यमंत्री रमन सिंह का मुक़ाबला भारतीय जनता पार्टी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुईं करुणा शुक्ला के साथ है.
करुणा शुक्ला अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी हैं तो रमन सिंह अटल बिहारी वाजपेयी के मंत्रिमंडल में राज्यमंत्री रह चुके हैं.
अटल आख़िर किसके हैं
चुनावों की घोषणा से ठीक पहले छत्तीसगढ़ सरकार ने नए रायपुर शहर का नाम अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में 'अटल नगर' रखने की घोषणा कर दी है.
वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने 'नवा छत्तीसगढ़' यानी भविष्य के छत्तीसगढ़ के संकल्प को भी अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर जारी किया है.
इस संकल्प पत्र का नाम 'अटल दृष्टि पत्र' रखा गया है जिसमे 2025 का छत्तीसगढ़ कैसा होगा इसकी परिकल्पना की गई है.
राजनंदगांव में टक्कर बेशक भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच है.
लेकिन, दोनों ही उम्मीदवार बीच अटल बिहारी वाजपेयी के लिए सहानुभूति को भुनाने की होड़ में लगे हुए हैं.
दूसरी तरफ कांग्रेस का आरोप है कि जीते जी, भारतीय जनता पार्टी ने अटल बिहारी वाजपेयी को तरजीह ही नहीं दी.
राजनांदगांव में मेरी मुलाक़ात करुणा शुक्ला से तब हुई, जब वो एक चुनावी सभा को संबोधित करने जा रही थीं.
अपने भाषणों में वो कई बार अटल बिहारी वाजपेयी का नाम लेती हैं.
सिर्फ शुक्ला ही नहीं, चुनावी सभा में बोलने वाले कांग्रेस के स्थानीय नेता भी अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हुए नज़र आते हैं.
सभा के बाद बीबीसी से बात करते हुए करुणा शुक्ला कहती हैं, "अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री रहते हुए छत्तीसगढ़ के अलग राज्य बनने का सपना साकार हुआ. लेकिन राज्य की वर्षगाँठ पर कभी भारतीय जनता पार्टी ने वाजपेयी जी को ना याद किया ना कभी किसी पोस्टर पर उनकी तस्वीर ही लगाई."
शुक्ला कहती हैं कि राजोत्सव के दौरान बॉलीवुड के अभिनेताओं और अभिनेत्रियों को बुलाकर सम्मान दिया जाता रहा है, लेकिन कभी भी अटल बिहारी वाजपेयी का ना तो नाम लिया गया और ना ही उनके कभी पोस्टर ही लगाए गए.
इसकी वजह ये है कि राजनांदगांव की चुनावी जंग में उतरे दो क़द्दावर नेताओं की अटल बिहारी वाजपेयी पर अपनी-अपनी दावेदारी है.
इस सीट पर मुख्यमंत्री रमन सिंह का मुक़ाबला भारतीय जनता पार्टी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुईं करुणा शुक्ला के साथ है.
करुणा शुक्ला अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी हैं तो रमन सिंह अटल बिहारी वाजपेयी के मंत्रिमंडल में राज्यमंत्री रह चुके हैं.
अटल आख़िर किसके हैं
चुनावों की घोषणा से ठीक पहले छत्तीसगढ़ सरकार ने नए रायपुर शहर का नाम अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में 'अटल नगर' रखने की घोषणा कर दी है.
वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने 'नवा छत्तीसगढ़' यानी भविष्य के छत्तीसगढ़ के संकल्प को भी अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर जारी किया है.
इस संकल्प पत्र का नाम 'अटल दृष्टि पत्र' रखा गया है जिसमे 2025 का छत्तीसगढ़ कैसा होगा इसकी परिकल्पना की गई है.
राजनंदगांव में टक्कर बेशक भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच है.
लेकिन, दोनों ही उम्मीदवार बीच अटल बिहारी वाजपेयी के लिए सहानुभूति को भुनाने की होड़ में लगे हुए हैं.
दूसरी तरफ कांग्रेस का आरोप है कि जीते जी, भारतीय जनता पार्टी ने अटल बिहारी वाजपेयी को तरजीह ही नहीं दी.
राजनांदगांव में मेरी मुलाक़ात करुणा शुक्ला से तब हुई, जब वो एक चुनावी सभा को संबोधित करने जा रही थीं.
अपने भाषणों में वो कई बार अटल बिहारी वाजपेयी का नाम लेती हैं.
सिर्फ शुक्ला ही नहीं, चुनावी सभा में बोलने वाले कांग्रेस के स्थानीय नेता भी अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हुए नज़र आते हैं.
सभा के बाद बीबीसी से बात करते हुए करुणा शुक्ला कहती हैं, "अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री रहते हुए छत्तीसगढ़ के अलग राज्य बनने का सपना साकार हुआ. लेकिन राज्य की वर्षगाँठ पर कभी भारतीय जनता पार्टी ने वाजपेयी जी को ना याद किया ना कभी किसी पोस्टर पर उनकी तस्वीर ही लगाई."
शुक्ला कहती हैं कि राजोत्सव के दौरान बॉलीवुड के अभिनेताओं और अभिनेत्रियों को बुलाकर सम्मान दिया जाता रहा है, लेकिन कभी भी अटल बिहारी वाजपेयी का ना तो नाम लिया गया और ना ही उनके कभी पोस्टर ही लगाए गए.
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